संप्रदाय, जो नियति की अटलता में विश्वास करता था-
The sect which believed in abiding nature of destiny:
मक्खलिगोसाल प्रारंभ में महावीर के शिष्य थे, किंतु बाद में मतभेद के चलते इन्होंने महावीर की शिष्यता त्याग दी। विभिन्न स्रोत नंदवच्छ एवं किससंकिच्च नामक आजीवक आचार्यों का उल्लख करते हैं, जो मक्खलिपुत्त गोसाल से पूर्व भी कार्यरत थे। इसका अभिप्राय है कि गोसाल से पहले भी आजीवक संप्रदाय उपस्थित था। संभवतः इसे सर्वप्रथम लोकप्रियता गोसाल द्वारा दिलाई गई। अतः इन्हें ही परंपरानुसार आजीवक संप्रदाय का प्रवर्तक माना गया। इनका मत 'नियतिवाद' या भाग्यवाद कहा जाता है, जिसके अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु भाग्य द्वारा पूर्व नियंत्रित एवं संचालित होती है।
During 3rd and 4th century Ikshvaku dynasty ruled over southern India. Though Ikshvakus of southern India followed a Vedic religion but also supported the Buddhist religion. Bengal emerged as the prominent nucleus of Buddhism during Pala dynasty. It was due to the support of Pala reign behind Buddhist. Thus, statement (I) is wrong while statement (II) is correct.